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Tuesday, July 3, 2018

नीति आयोग और उसके ढाई वर्ष ( NITI Commission and its Two and Half years)

नीति आयोग (राष्‍ट्रीय भारत परिवर्तन संस्‍थान) भारत सरकार द्वारा गठित एक नया संस्‍थान है जिसे योजना आयोग के स्‍थान पर बनाया गया है।[1] 1 जनवरी 2015 को इस नए संस्‍थान के संबंध में जानकारी देने वाला मंत्रिमंडल का प्रस्‍ताव जारी किया गया।[2] यह संस्‍थान सरकार के थिंक टैंक के रूप में सेवाएं प्रदान करेगा और उसे निर्देशात्‍मक एवं नीतिगत गतिशीलता प्रदान करेगा। नीति आयोग, केन्‍द्र और राज्‍य स्‍तरों पर सरकार को नीति के प्रमुख कारकों के संबंध में प्रासंगिक महत्‍वपूर्ण एवं तकनीकी परामर्श उपलब्‍ध कराएगा। इसमें आर्थिक मोर्चे पर राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय आयात, देश के भीतर, साथ ही साथ अन्‍य देशों की बेहतरीन पद्धतियों का प्रसार नए नीतिगत विचारों का समावेश और विशिष्‍ट विषयों पर आधारित समर्थन से संबंधित मामले शामिल होंगे। [3]
योजना आयोग और निति आयोग में मूलभूत अंतर है कि इससे केंद्र से राज्यों की तरफ चलने वाले एक पक्षीय नीतिगत क्रम को एक महत्वपूर्ण विकासवादी परिवर्तन के रूप में राज्यों की वास्तविक और सतत भागीदारी से बदल दिया जाएगा।[1]
नीति आयोग ग्राम स्तर पर विश्वसनीय योजना तैयार करने के लिए तंत्र विकसित करेगा और इसे उत्तरोत्तर उच्च स्तर तक पहुंचाएगा। आयोग राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, प्रैक्टिशनरों तथा अन्य हितधारकों के सहयोगात्मक समुदाय के जरिए ज्ञान, नवाचार, उद्यमशीलता सहायक प्रणाली बनाएगा। इसके अतिरिक्‍त आयोग कार्यक्रमों और नीतियों के क्रियान्वयन के लिए प्रौद्योगिकी उन्नयन और क्षमता निर्माण पर जोर देगा।[1]
NITI COMMISSION 
नीति आयोग

नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर ट्रांस्फोर्मिंग इंडिया
(National Institution for Transforming India 
गठन1 जनवरी 2015; 2.5 वर्ष पहले
पूर्ववर्तीयोजना आयोग
अधिकारक्षेत्राभारत सरकार
मुख्यालयनई दिल्ली
कार्यपालकनरेंद्र मोदी, अध्यक्ष (चेयरपर्सन)
हाल ही में नीति आयोग ने अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूरे किए हैं। इस मौके पर योजना आयोग के एवज में काम कर रहे नीति आयोग की प्रकृति और कार्य को समझने की आवश्यकता है। पंचवर्षीय योजनाओं को तैयार करके उन्हें लागू करवाना एवं राज्यों को वित्तिय सहायता देना ही योजना आयोग के दो प्रमुख कार्य थे। इसमें से कोई भी काम नीति आयोग का नहीं है। पंचवर्षीय योजना का अंत इस वर्ष मार्च में हो जाएगा। जहाँ तक राज्यों को वित्तिय सहायता देने का प्रश्न है, वह भी नीति आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। चैदहवें वित्त आयोग ने पहले ही राज्यों को दी जाने वाली धनराशि के प्रतिशत को 32 से बढ़ाकर 42 कर दिया है। इसलिए अब नीति आयोग के पास राज्यों को धन आवंटित करने की कोई गुंजाइश ही नही हैं।
नीति आयोग के निम्नलिखित उद्देश्य  –
  • राष्ट्रीय उद्देश्यों को दृष्टिगत रखते हुए राज्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं, क्षेत्रों और रणनीतियों का एक साझा दृष्टिकोण विकसित करेगा। नीति आयोग का विजन बल प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को ‘राष्ट्रीय एजेंडा’ का प्रारूप उपलब्ध कराना है।
  • सशक्त राज्य ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकता है इस तथ्य की महत्ता को स्वीकार करते हुए राज्यों के साथ सतत आधार पर संरचनात्मक सहयोग की पहल और तंत्र के माध्यम से सहयोगपूर्ण संघवाद को बढ़ावा देगा।
  • ग्राम स्तर पर विश्वसनीय योजना तैयार करने के लिए तंत्र विकसित करेगा और इसे उत्तरोत्तर उच्च स्तर तक पहुंचाएगा।
  • आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि जो क्षेत्र विशेष रूप से उसे सौंपे गए हैं उनकी आर्थिक कार्य नीति और नीति में राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को शामिल किया गया है।
  • हमारे समाज के उन वर्गों पर विशेष रूप से ध्यान देगा जिन तक आर्थिक प्रगति से उचित प्रकार से लाभान्वित ना हो पाने का जोखिम होगा।
  • रणनीतिक और दीर्घावधि के लिए नीति तथा कार्यक्रम का ढ़ांचा तैयार करेगा और पहल करेगा। साथ ही उनकी प्रगति और क्षमता की निगरानी करेगा। निगरानी और प्रतिक्रिया के आधार पर मध्यावधि संशोधन सहित नवीन सुधार किए जाएंगे।
  • महत्वपूर्ण हितधारकों तथा समान विचारधारा वाले राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय थिंक टैंक और साथ ही साथ शैक्षिक और नीति अनुसंधान संस्थानों के बीच भागीदारी को परामर्श और प्रोत्साहन देगा।
  • राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, प्रैक्टिशनरों तथा अन्य हितधारकों के सहयोगात्मक समुदाय के जरिए ज्ञान, नवाचार, उद्यमशीलता सहायक प्रणाली बनाएगा।
  • विकास के एजेंडे के कार्यान्वयन में तेजी लाने के क्रम में अंतर-क्षेत्रीय और अंतर-विभागीय मुद्दों के समाधान के लिए एक मंच प्रदान करेगा।
  • अत्याधुनिक कला संसाधन केंद्र बनाना जो सुशासन तथा सतत और न्यायसंगत विकास की सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणाली पर अनुसंधान करने के साथ-साथ हितधारकों तक जानकारी पहुंचाने में भी मदद करेगा।
  • आवश्यक संसाधनों की पहचान करने सहित कार्यक्रमों और उपायों के कार्यान्वयन के सक्रिय मूल्यांकन और सक्रिय निगरानी की जाएगी। ताकि सेवाएं प्रदान करने में सफलता की संभावनाओं को प्रबल बनाया जा सके।
  • कार्यक्रमों और नीतियों के क्रियान्वयन के लिए प्रौद्योगिकी उन्नयन और क्षमता निर्माण पर जोर।
  • राष्ट्रीय विकास के एजेंडा और उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अन्य आवश्यक गतिविधियां संपादित करना।

नीति आयोग का गठन इस प्रकार होगा-
1. भारत के प्रधानमंत्री- अध्यक्ष। Prime minister is the Chairmen of NITI commission= Nrender Modi 
2नीति आयोग के उपाध्यक्ष - श्री अरविंद पणगरिया, (अर्थशास्‍त्री)
3. गवर्निंग काउंसिल में राज्यों के मुख्यमंत्री और केन्द्रशासित प्रदेशों(जिन केन्द्रशासित प्रदेशो में विधानसभा है वहां के मुख्यमंत्री ) के उपराज्यपाल शामिल होंगे।
4. विशिष्ट मुद्दों और ऐसे आकस्मिक मामले, जिनका संबंध एक से अधिक राज्य या क्षेत्र से हो, को देखने के लिए क्षेत्रीय परिषद गठित की जाएंगी। ये परिषदें विशिष्ट कार्यकाल के लिए बनाई जाएंगी। भारत के प्रधानमंत्री के निर्देश पर क्षेत्रीय परिषदों की बैठक होगी और इनमें संबंधित क्षेत्र के राज्यों के मुख्यमंत्री और केन्द्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल होंगे (इनकी अध्यक्षता नीति आयोग के उपाध्यक्ष करेंगे)।
5. संबंधित कार्य क्षेत्र की जानकारी रखने वाले विशेषज्ञ और कार्यरत लोग, विशेष आमंत्रित के रूप में प्रधानमंत्री द्वारा नामित किए जाएंगे।
6. पूर्णकालिक संगठनात्मक ढांचे में (प्रधानमंत्री अध्यक्ष होने के अलावा) निम्न होंगे।
(क) उपाध्यक्षः प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त।
(ख) सदस्यः पूर्णकालिक
(ग) अंशकालिक सदस्यः अग्रणी विश्वविद्यालय शोध संस्थानों और संबंधित संस्थानों से अधिकतम दो पदेन सदस्य, अंशकालिक सदस्य बारी के आधार पर होंगे।
(घ) पदेन सदस्यः केन्द्रीय मंत्रिपरिषद से अधिकतम चार सदस्य प्रधानमंत्री द्वारा नामित होंगे। यदि बारी के आधार को प्राथमिकता दी जाती है तो यह नियुक्ति विशिष्ट कार्यकाल के लिए होंगी।
(ङ) मुख्य कार्यकारी अधिकारीः भारत सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी को निश्चित कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त किया जाएगा।
(च) सचिवालय आवश्यकता के अनुसार

                                      नीति आयोग के ढाई वर्ष 
नीति आयोग के बहुत से कामों में से तीन मुख्य काम हैं – सहयोगी एवं प्रतियोगी संघवाद को बढ़ावा देना, नीति निर्माण में केंद्र सरकार को सहयोग देना और तीसरे, सरकार के विचार- केंद्र (Think Tank) के रूप में काम करना। नीति आयोग के ये तीनों ही काम अपने आप से अलग-अलग होने के बजाय एक दूसरे के परिपूरक हैं।
सभी राज्यों के मुख्यमंत्री एवं केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल नीति आयोग की संचालन परिषद् (Governing Council) के हिस्से हैं। इसकी पहली और एकमात्र बैठक फरवरी 2015 में संपन्न हुई थी। इसमें मुख्यमंत्रियों के तीन उपवर्ग बनाए गऐ थे, जो प्रधानमंत्री को केंद्र संरक्षित योजनाओं; जैसे-कौशल विकास एवं स्वच्छ भारत मिशन पर सलाह देंगे। इस बैठक में कृषि विकास एवं गरीबी उन्मूलन पर दो कार्यदल भी गठित किए गये थे। ऐसे कार्यदल राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में भी गठित किए गए।
आयोग के सहयोग से इन उपवर्गों ने अल्पावधि में ही अपना काम पूरा करके रिपोर्ट सौंप दी। इसी प्रकार कार्यदलों का काम भी जल्दी ही पूरा हो गया। इन पाँचों की रिपोर्टों में दी गई सिफारिशों को या तो कार्यान्वित किया जा चुका है उन्हें विचाराधीन रखा गया है।
आयोग ने राज्यों में अनेक सुधारों को भी प्रोत्साहन दिया है। इसने एक आदर्श भूमि पट्टा कानून को निरूपित किया है, जिसे मध्यप्रदेश सरकार ने अपना लिया है तथा उत्तर प्रदेश ने पहले से विद्यमान कानून में आयोग के निरूपित कानून को सम्मिलित कर लिया है। अन्य राज्य भी इसे अपना रहे हैं।आयोग ने कृषि विपणन में सुधारों के लिए एक अभियान चलाया है। इसने विभिन्न मंत्रालयों के पास राज्यों के लंबित पड़े मामलों के शीघ्र निपटाने के भी प्रयास किए हैं। यह विभिन्न मंत्रालयों से संबद्ध राज्य स्तरीय अधिकारियों के साथ नियमित संपर्क बनाकर राज्यों के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतरीन कार्यों का प्रसार भी करता है।
केंद्र के नीति निर्माता की भूमिका में आयोग ने सार्वजनिक क्षेत्र के अनेक बीमार संस्थानों को बंद करने के लिए उनकी पहचान की है। इनमें से 17 ईकाईयों पर काम शुरू किया जा चुका है। आयोग ने विनिवेश के लिए काम कर रही अनेक ईकाईयों को चुना है। वित्त मंत्रालय को चाहिए कि इन ईकाईयों को बेचने का प्रबंध करे। आयोग ने 1956 के चिकित्सा परिषद् आयोग अधिनियम में भी जबर्दस्त बदलाव किये है । इसके बदले यह चिकित्सा शिक्षा आयोग अधिनियम लेकर आया है, जिससे भारत में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन किया जा सकेगा।
आयोग ने राष्ट्रीय ऊर्जा नीति का एक विस्तृत मसौदा तैयार कर लिया है। उसे किसी जन-मंच पर लाकर उस पर विस्तार से चर्चा होना अभी बाकी है। देश में 20 स्तरीय विश्वविद्यालय बनाने के लिए भी आयोग काम कर रहा है। इसके साथ ही 1956 के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम एवं 1957 के अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् अधिनियम में भी सुधार करने की तैयारी की जा रही है। आयोग ने अच्छी नौकरियाँ उपलब्ध कराने की दृष्टि से तटीय रोजगार क्षेत्र का शुभारंभ कर दिया है।
सरकार के विचार-केंद्र की तरह काम करते हुए आयोग ने एक ऐसी पुस्तक तैयार की है, जिसमें सर्वोत्कृष्ट कार्यप्रणाली, इससे जुड़ी कार्य-शालाओं के आयोजन, भारतीय ऊर्जा सुरक्षा परिदृश्य 2047, प्रायोजित शोध एवं विभिन्न अवसरों पर प्रकाशित लेख शामिल किए गए हैं। आयोग ने 15 वर्षों की झलक, 7 वर्षों की कार्यनीति एवं तीन वर्षों के एक्शन प्लान संबंधी दस्तावेज भी लाने की तैयारी कर रखी है। आयोग ने थर्मन शन्मुग्रत्नम सिंगापुर के उपमुख्यमंत्री एवं बिल गेट्स जैसे वक्ताओं की एक व्याख्यान श्रृंखला का भी आयोजन किया है। प्रधानमंत्री, केबिनेट एवं कई सचिवों ने भी इस व्याख्यान श्रृंखला का लाभ उठाया।
अटल इनोवेशन मिशन (Atal Innovation Mission) के द्वारा आयोग ने नवपरिवर्तन एवं उद्यमिता की एक हवा पूरे देश में चला दी है। इसको और प्रोत्साहित करने के लिए देश के 200 विद्यालयों में लैब एवं इन्क्यूबेटर बनाए जाएंगे।योजना आयोग के 1200 पदों के स्थान पर आयोग ने 500 पद ही रखे हैं। साथ ही लगभग 45 युवा व्यावसायिक एवं 12 वरिष्ठ अधिकारियों को बाहर से नियुक्त किया है। इससे आयोग की ऊर्जाशक्ति में बहुत वृद्धि हुई है।
 टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित अरविंद पनगढ़िया के लेख पर आधारित।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सामयिकी कैप्सूल (Current Affairs Capsule for all competitive exams)


1. मोदी की यात्रा में लिखी गई भारत-इस्रइल दोस्ती की नई इबारत : बने साझीदार, सात समझौते
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक इस्रइल दौरे से दोनों देशों के बीच रिश्तों की नई इबारत लिखी गई। प्रधानमंत्री की यात्रा के दूसरे दिन दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए।
• दोनों देशों के बीच कृषि, साइंस एवं टेक्नॉलजी, स्पेस और वॉटर मैनेजमेंट जैसे अहम क्षेत्रों में कुल 7 समझौते हुए। नेतन्याहू और मोदी ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए दोनों देशों की प्रगाढ़ता और दोस्ती का एक बार फिर जिक्र किया।
• मोदी ने अपने संबोधन में नेतन्याहू और उनके परिवार को भारत आने का न्योता दिया, जिसे इस्रइली प्रधानमंत्री ने तत्काल मंजूर भी कर लिया।
• इस्रइल ने उत्तर प्रदेश में गंगा की सफाई और वॉटर मैनेजमेंट के क्षेत्र में सहयोग देने को लेकर समझौता किया है। दोनों नेताओं ने आतंक के खिलाफ लड़ाई को एक साथ मिलकर लड़ने का फैसला किया है।
• पीएम मोदी की इस यात्रा में भारत और इस्रइल के बीच न केवल द्विपक्षीय संबंधों को लेकर समझौते हुए, बल्कि नियंतण्र समस्याओं और जरूरतों पर भी बात की गई। इस्रइल ने भारत के साथ मिलकर र्थड र्वल्ड के देशों खासकर अफ्रीकी लोगों के लिए काम करने की इच्छा जताई।
• नेतन्याहू बोले, इतिहास बन रहा : समझौतों की घोषणा के बाद दोनों नेताओं ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित भी किया।
• नेतन्याहू ने पहले बोलते हुए कहा कि ‘‘हम इतिहास बना रहे हैं। यह मेरे लिए व्यक्तिगत और नेशनल-इंटरनेशनल, दोनों ही तौर पर अहम है। नेतन्याहू ने हिब्रू और हिंदी के एक गायक के गीत का जिक्र करते हुए कहा कि आप और हम मिलकर दुनिया बदल सकते हैं।
• नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि भारत और इस्रइल के बीच केवल द्विपक्षीय वार्ता नहीं हुई बल्कि नियंतण्र मुद्दों पर भी र्चचा हुई।
• उन्होंने कहा कि ‘‘हम दो देशों से इतर तीसरी दुनिया के देशों के लिए भी जागरूक हैं। अफ्रीका के लोगों के लिए भी हमने बातचीत की।’ नेतन्याहू ने कहा, ‘‘यह पार्टनरशिप अच्छे के लिए है, अच्छे को हासिल करने के लिए है और यह एक अच्छा दिन है। शुक्रिया मेरे दोस्त मोदी।’
• 40 मिलियन डॉलर के भारत-इस्रइल इंडस्ट्रियल (आरऐंडडी) ऐंड टेक्नॉलॉजिकल इनवेशन फंड के लिए एमओयू।
• भारत में जल संरक्षण के लिए एमओयू।द भारत के राज्यों में पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए एमओयू।
• भारत-इस्रइल डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन- कृषि के लिए 3 साल के कार्यक्रम (2018-2020) की घोषणा।
• इसरो और इस्रइल के बीच परमाणु घड़ी के लिए सहयोग की योजना।
• जीईओ-एलईओ ऑप्टिकल लिंक के लिए एमओयू।द छोटे सैटलाइट्स को बिजली के लिए एमओयू।
2. परमाणु हथियारों पर वार्ता के लिए तैयार नहीं उत्तर कोरिया
• अमेरिका के लिए सिरदर्द बने उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने साफ कर दिया है कि उनका देश अपने हथियारों की कीमत पर कोई समझौता नहीं करेगा। वह परमाणु हथियार खत्म करने के मुद्दे पर किसी से कोई बात नहीं करेगा। किम जोंग ने कहा, हमने अमेरिका को अपनी ताकत दिखा दी है।
• तानाशाह ने यह बात अंतर-महाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइल (आइसीबीएम) के सफल परीक्षण के बाद कही है। मंगलवार को हुए इस परीक्षण के बाद अमेरिका के कई ठिकाने उत्तर कोरिया के निशाने पर आ गए हैं। उत्पन्न स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक होगी।
• परमाणु हथियार संपन्न उत्तर कोरिया इन दिनों न केवल अमेरिका बल्कि उसके मित्र राष्ट्र दक्षिण कोरिया और जापान के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है। अमेरिका के हवाई द्वीप और अलास्का का इलाका, एक हजार किलोमीटर दूर स्थित जापान और दक्षिण कोरिया अब उत्तर कोरिया की मिसाइलों की पहुंच में हैं।
• सूत्रों के अनुसार अपनी मिसाइलों के निशाने पर पूरे अमेरिका को लेने के लिए उत्तर कोरिया अभी बैलेस्टिक मिसाइलों के कुछ और परीक्षण करेगा।
• इसका सुबूत मंगलवार को बैलेस्टिक मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद किम जोंग की दंभ से भरी हंसी और वैज्ञानिकों को परीक्षणों के सिलसिला जारी रखने का निर्देश था।
• परीक्षण के बाद के फुटेज उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया केसीएनए ने जारी किये हैं। आंकड़ों के अध्ययन के बाद मीडिया ने बताया है कि उत्तर कोरिया की बैलेस्टिक मिसाइल आठ हजार किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। यह हाइड्रोजन बम, परमाणु बम और अन्य परंपरागत हथियार ले जा सकती है।
3. जलवायु परिवर्तन और कोरियाई संकट के बीच जर्मनी में जुटने लगे दुनिया के दिग्गज
• उत्तर कोरिया संकट और जलवायु परिवर्तन पर खींचतान के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के नेता जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में जुटने लगे हैं। शुक्रवार से शुरू हो रहे जी-20 शिखर सम्मेलन में दोनों मुद्दों के छाए रहने की संभावना है।
• ट्रंप ने पिछले महीने ऐतिहासिक पेरिस करार से हटने की घोषणा की थी। इसके बाद जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयास के कमजोर होने की आशंका गहरा गई है। इसके अलावा मंगलवार को उत्तर कोरिया ने पहले इंटर कांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण कर अमेरिका समेत पूरी दुनिया की सिरदर्दी और बढ़ा दी है। सम्मेलन में दोनों मुद्दों के केंद्र में रहने की संभावना है।
• अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा, ‘आइसीबीएम का परीक्षण अमेरिका, सहयोगी देशों, क्षेत्र और पूरी दुनिया के लिए नया खतरा है।’
• जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान सबकी नजरें राष्ट्रपति ट्रंप पर होंगी जो उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को हर हाल में रोकना चाहते हैं। इसके लिए वह चीन पर लगातार दबाव भी बना रहे हैं। इसके अलावा ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच संभावित मुलाकात पर भी दुनिया की निगाहें टिकी हैं।
• अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में रूसी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच चल रही है। ट्रंप के कई विश्वस्त सहयोगियों को इसके चलते अपने पद से इस्तीफा तक देना पड़ा है। व्यापार के क्षेत्र में ट्रंप की संरक्षणवाद की नीति का मुद्दा भी उठने की संभावना है।
• चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो एबी के बीच मुलाकात पर भी नजर रहेगी। इसके अलावा सीरिया और यूक्रेन से जुड़े मसले भी उठ सकते हैं।
• जलवायु परिवर्तन भी अहम मुद्दा : जी-20 बैठक में जलवायु परिवर्तन अहम मुद्दा बनकर उभरेगा। ट्रंप के पेरिस करार से हटने की घोषणा के बावजूद भारत, चीन, जर्मनी समेत दुनिया के तमाम देश समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है।
• ऑक्सफोर्ड एनालिटिक्स के अर्थशास्त्री एडम स्लेटर ने इस मुद्दे पर अमेरिका और अन्य सदस्य देशों में ध्रुवीकरण की आशंका जताई है। हालांकि, कई देशों को इस मसले पर समाधान निकलने की उम्मीद जताई है।
4. शीर्ष अदालत ने केंद्र से किया सवाल :चुनाव आयोग में नियुक्तियों के लिए कानून क्यों नहीं
• उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केन्द्र से सवाल किया कि भारत निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए संविधान में किए गए प्रावधानों के अनुरूप कोई कानून क्यों नहीं है। बहरहाल, न्यायालय ने यह भी कहा कि अभी तक निर्वाचन आयोग में अच्छे लोगों की नियुक्ति हुई है।
• प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर और न्यायमूर्ति डीवाई चन्द्रचूड़ की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 में प्रावधान किया गया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति तय कानून के तहत होगी, लेकिन अभी तक कोई कानून नहीं बनाया गया है।
• पीठ ने केन्द्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार से पूछा, आशा है कि संसद कानून बनाएगी। कानून नहीं बनाया गया है, ऐसे में क्या अदालत प्रक्रिया तय कर सकती है। पीठ वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से अनूप परनवाल की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवायी कर रही थी।
• याचिका में कहा गया है कि मुख्य निवार्चन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया होनी चाहिए।
• याचिका में उच्च और उच्चतम न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए स्वतंत्र प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए भी ऐसी ही प्रक्रिया होनी चाहिए।
5. भारतीय बासमती राइस पर यूरोपीय संघ सख्त
• चावल निर्यातकों के संगठन एआईआरईए ने बुधवार को कहा कि यूरोपीय यूनियन (ईयू) के कठोर नियमों से भारत का बासमती निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है और जहां करीब 1,700 करोड़ रपए का कारोबार पाकिस्तान के पास जा सकता है।
• एआईआरईए ने यह बात ऐसे समय कही है जबकि बासमती के मानकों का समला सुलझाने के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल के यूरोपीय संघ (ईयू) जाने वाला है।यूरोपीय आयोग ने हाल में जो नियम जारी किए है उसके तहत अगले साल से बासमती चावल में फंफूदीनाशक, रसायन ट्रायसिक्लाजोल की अधिकतम स्वीकृत सीमा अवशिष्ट सीमा (एमआरएल) घटाकर 0.01 मिग्राप्रति किलो कर दी गई है।
• ऐसा सभी देशों के लिए किया गया है। एआईआरईए के अध्यक्ष विजय सेतिया ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘यूरोपीय संघ ने ट्रायसिक्लाजोल के मुद्दे पर भारतीय बासमती पर पाबंदी लगा दी है।बासमती चावल में इस फंफूदीनाशक रसायन के अवशिष्ट के अनुपात को शून्य के स्तर पर लाना संभव नहीं है। इससे चावल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
• भारत सरकार के दल का इस मुद्दे पर बात करने के लिए 12 जुलाई को ब्रुसेल्स, बेल्जियम का दौरा करने का कार्यक्रम निर्धारित है। बासमती की दो सुगंधित किस्में पीबी वन और 1401 का अधिकतम निर्यात यूरोपीय संघ को किया जाता है।

6. उच्च आर्थिक वृद्धि के बावजूद नहीं निकल रहे नौकरियों के अवसर

• उच्च आर्थिक वृद्धि के बावजूद अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन नहीं हो रहा है इस तरह की आलोचनाओं को सरकार द्वारा दरकिनार किए जाने के बावजूद श्रम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि रोजगार सृजन में गिरावट आई है।
• वित्तीय ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।ब्रोकरेज फर्म द्वारा जुटाए गए श्रम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक डिग्री धारक युवाओं की संख्या के मुकाबले रोजगार के नए अवसर पैदा होने का अनुपात पिछले सालों के मुकाबले बिगड़ा है।
• रोजगार के ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक वित्त वर्ष 2016-17 के शुरुआती नौ माह के दौरान (बैंकों की नौकरी को छोड़कर) एक लाख 90 हजार रोजगार ही पैदा हुए जबकि पिछले वित्त वर्ष में 88 लाख युवाओं ने स्नातक की डिग्री हासिल की। इस तरह डिग्री धारकों और पैदा हुए रोजगार के आंकड़े में भारी अंतर सामने आया।
• जेएम फाइनेंशियल की ‘‘मैं अपनी डिग्री का क्या करूं’ नामक रिपोर्ट में कहा गया है, जब स्नातकों की संख्या पैदा होने वाले रोजगार की संख्या से कहीं ज्यादा हो तो स्पष्ट रूप से श्रमिकों की मांग और उनकी आपूत्तर्ि के बीच का अंतर कहीं ज्यादा हो जाता है।
• उल्लेखनीय है कि नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने पिछले सप्ताह रिजर्व बैंक के एक कार्यक्रम में देश की आर्थिक वृद्धि को रोजगार विहीन बताए जाने के कुछ अर्थशास्त्रियों और विपक्ष की आलोचना को मात्र कल्पना बताया और दावा किया कि 7 से 8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि से श्रम बाजार को काफी फायदा हुआ है।
• उन्होंने कहा था कि यदि 7 से 8 प्रतिशत की वृद्धि होती है तो यह ऐसी नहीं हो सकती है कि श्रम बाजार को इससे कोई फायदा नहीं हो रहा है। इस तरह की आर्थिक वृद्धि रोजगार पैदा किए बिना नहीं हो सकती है.. रोजगार सृजन हो रहा है। हालांकि उन्होंने इसके साथ कोई आंकड़े नहीं बताए केवल इतना कहा कि बेरोजगारी की दर तीन प्रतिशत के आसपास है।
• रिपोर्ट में कहा गया है कि तिमाही रोजगार सर्वेक्षण और रिजर्व बैंक के बैंकिंग रोजगार के आंकड़ों के मुताबिक सकल घरेलू उत्पाद में 65 प्रतिशत से अधिक का योगदान करने वाले नौ श्रम गहन क्षेत्रों में वित्त वर्ष 2010-11 से लेकर 2012-13 की अवधि में कुल मिलाकर 25 लाख रोजगार के अवसर पैदा हुए जबकि इस अवधि के दौरान 2.27 करोड़ लोगों ने उच्च शिक्षा क्षेत्र में डिग्री हासिल की।
• इस लिहाज से डिग्री हासिल करने वालों की संख्या और पैदा हुए रोजगार के अवसरों के हिसाब से प्रत्येक एक रोजगार के लिए नौ डिग्रीधारक छात्र का अनुपात रहा। रिपोर्ट के अनुसार वहीं इसके बाद के वर्ष में वित्त वर्ष 2012-13 से लेकर 2014-15 की अवधि में यह आंकड़ा दस लाख रोजगार और 2.59 डिग्रीधारक का रहा है।इस लिहाज से एक रोजगार के समक्ष 27 डिग्रीधारक का अनुपात रहा है।
• यह अनुपात पिछले आंकड़ों के मुकाबले तीन गुणा बढ़ गया। रोजगार सृजन के ताजा तिमाही आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2016-17 की पहले नौ माह के दौरान बैंक रोजगार को छोड़कर केवल 1.90 लाख रोजगार ही पैदा हुए जबकि इससे पिछले वर्ष में 88 लाख युवा उच्च शिक्षा पास करके निकले।
• श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार रोजगार सृजन में भारी गिरावटद सरकार ने किया था रोजगार सृजन न होने के आरोपों को खारिज
• 2016-17 के शुरुआती नौ माह में निकलीं सिर्फ 1.90 लाख नौकरियां
• बीते वित्त वर्ष में 88 लाख युवाओं को मिली थी स्नातक की डिग्री
• डिग्री धारकों और रोजगार के अवसरों में तेजी से बढ़ रहा है अंतर

7. पांच और बैंकों में सीधे जमा होगा पीएफ
• कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने पांच बैंकों के साथ समझौता किया है। इसके तहत बैंकों के जरिये ईपीएफओ को पीएफ की बकाया राशि आसानी से जमा कराई जा सकेगी। इसके अलावा सदस्यों को इनके जरिये सदस्यों को पीएफ, पेंशन और इंश्योरेंस राशि का भुगतान भी प्राप्त होगा।
• ईपीएफओ ने बैंक ऑफ बड़ौदा, आइसीआइसीआइ बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक म¨हद्रा बैंक के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। इससे उसे 125 करोड़ रुपये हर साल बचत होगी और पीएफ की राशि जल्दी मिलने से निवेश में तेजी आएगी।
• इससे सदस्यों को भी मिलेगा। सेवायोजक इन बैंकों में अपने बैंक खाते से आसानी से पीएफ की राशि नेट बैंकिंग के जरिये ईपीएफओ के खाते में जमा कर सकेंगे।
• अभी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को सेवायोजकों से पीएफ भुगतान लेना होता है और उसे अपने बैंक खाते में जमा करना होता है। इस पर उसे 12 प्रति ट्रांजैक्शन का खर्च भी उठाना पड़ता है।
• केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त वी. पी. जॉय ने संवाददाताओं को बताया कि सदस्यों को भुगतान करने में ट्रांजैक्शन चार्ज के रूप में संगठन को हर साल करीब 350 करोड़ रुपये का व्यय उठाना पड़ता है।
• भारतीय स्टेट बैंक के अलावा पीएनबी, इलाहाबाद बैंक, इंडियन बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में ऑनलाइन ट्रांजैक्शन व्यवस्था चालू होने के बाद यह खर्च घटकर 175 करोड़ रुपये रह गया।
• इन बैंकों के साथ समझौते के बाद खर्च घटकर मात्र 50 करोड़ रुपये रहने की संभावना है। संगठन सात और बैंकों के साथ इसी तरह का समझौता करने के लिए बातचीत कर रहा है।
• इन बैंकों में आइडीबीआइ बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, कॉरपोरेशन, इंडियन ओवरसीज बैंक, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र शामिल हैं।
• इस मौके पर श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि ट्रांजैक्शन चार्ज कम होने के बाद संगठन प्रशासनिक शुल्क घटाने पर विचार कर सकता है। अभी तक प्रशासनिक खर्च घटाकर 0.65 किया जा चुका है। इससे पहले यह खर्च 1.10 फीसद तक था। यह चार्ज पीएफ अंशदान के साथ सेवायोजक से लिया जाता हैl

Current Affairs of First week July 2017


                                                                         Full week news with Coffee


01/07/17

1. US President Donald Trump has nominated Indiana's health commissioner Jerome Adams to serve as the next US surgeon general.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के अगले सर्जन जनरल के लिए इंडियाना के स्वास्थ्य आयुक्त जेरोम एडम्स को नामित किया।

2. Indigenously developed mobile application for digitizing vaccine logistics, 'eVIN', has won the prestigious GSMA Asia Mobile Award 2017 (AMO) for outstanding contribution to the United Nation's sustainable development goals in Asia.

देश में टीकों की उपलब्धता और उससे जुड़ी तमाम जानकारियों के प्रबंधन में उपयोगी स्वदेश में विकसित मोबाइल ऐप 'ईविन' ने एशिया में सतत विकास के संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्यों की दिशा में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित जीएसएमए एशिया मोबाइल अवार्ड 2017 (एएमओ) जीता।

3. The government has appointed Arvind Kathpalia director of operations at Air India.

सरकार ने अरविंद काथपालिया को एयर इंडिया का परिचालन निदेशक नियुक्त किया। 

4. Popular singer Sabita Chowdhury died. She was 72.

लोकप्रिय गायिका सबिता चौधरी का निधन हो गया। वह 72 वर्ष की थीं।

5. Alibaba and Tencent are among the seven Chinese companies that made it to MIT Technology Review's annual listing of the 50 smartest companies. Chinese Company Tencent was ranked 8th and Jack Ma-led Chinese e-commerce giant Alibaba was placed at 41st position. 


राष्ट्रपति के चुनाव का विश्लेषण

              
 N.D.A. ने कानपुर (UP) के दलित नेता राम नाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है. कोविंद संघ के दलित नेता हैं, वे LAW Expert हैं, Supreme Court. व High Court में 16 वर्ष वकालत भी की है. कोविंद भाजपा से 2 बार (1994-2006) राज्य सभा के सांसद रहें हैं. वर्तमान में कोविंद बिहार के राज्यपाल  हैं.

U.P.A. ने 22 जून को Delhi में 17 विपक्षी दलों के साथ वार्ता की और अन्ततः जे.डी.यू. के शरद यादव ने दलित नेत्री व भूतपूर्व लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) मीरा कुमार के नाम का प्रस्ताव दिया, जिसे विपक्षी दलों ने सर्वसम्मत से राष्ट्रपति पद हेतु उम्मीदवार बनाया.

13 राज्यों में बी.जे.पी. की सरकार है, हालही में यू.पी. व उत्तराखंड में प्रचंड बहुमत भी प्राप्त हुआ है. वस्तुतः N.D.A. के पास कुल 5 लाख 32 हज़ार वोट है, जबकि उसे अपनी जीत के लिए 17 हज़ार 422 वोट और चाहिए. N.D.A. द्वारा अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए Y.R.S., T.R.S., B.J.D. आदि जैसे गैर एन.डी.ए. दल से समर्थन प्राप्त करना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कूटनीति है. जो U.P.A. के लिए चिंतनीय है.
Y.R.S.. कांग्रेस - 17666 वोट, T.R.S.. - 22048 वोट, नवीन पटनायक (उड़ीसा) -27257 वोट के साथ बिहार के मुख्यमंत्री माननीय Nitish Kumar का समर्थन एन.डी.ए. के प्रबल दावेदारी को सुनिश्चित कर दिया है.
अभी तक शिव सेना का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है और Lalu Yadav ने नितीश को ऐतिहासिक भूल न करने की सलाह भी दी है. फ़िरभी एन.डी.ए. को इन दोनों दलों से समर्थन न मिलने पर भी बहुमत का अभाव नहीं है.
सपा के रामगोपाल ने मीरा कुमार को कोविंद से बेहतर उम्मीदवार बताया है. B.S.P. ने भी मीरा कुमार का समर्थन किया है. तृणमूल कांग्रेस, J.D.U., C.P.I.. आदि विपक्षी दलों ने मीरा कुमार का समर्थन किया है. दिलचस्प बात ये है कि "आप" पार्टी को न तो एन.डी.ए ने महत्व दिया और ना ही यू.पी.ए. ने, ऐसे में अरविंद केजरीवाल के मनोदशा चिंतनीय व अवसादग्रस्त है.
सत्ता बनाम विपक्ष के उमीदवार के प्रस्ताव व जीत के संदर्भ में पत्रकार जगत भी काफ़ी उत्साहित है. वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय का मत है कि पहले कोविंद का कोई जिक्र नहीं था, पर हालही के यू.पी. में हुए राजपूत बनाम दलित जातीय संघर्ष को ध्यान में रख कर कोविंद का नाम प्रस्तावित किया गया.  अतः 2019 के लोकसभा चुनाव में दलितों (16-18%) को जोड़ने हेतु कोविंद का नाम प्रस्तावित किया गया. पत्रकार जगत का मत है कि विपक्षी दलों द्वारा लगातार लगाया गया यह आरोप कि संघ व सवर्ण द्वारा दलितों का शोषण हो रहा है, आरोप को निराधार बताने तथा दलित वोट प्राप्त करने के उद्देश्य से एन.डी.ए. द्वारा कोविंद को उम्मीदवार बनाया गया.  कोविंद के काट में विपक्षी दलों के समर्थन पाने के लिए यू.पी.ए. ने एक तरफ़ दलित और दूसरी तरफ़ महिला के प्रति श्रद्धा के नाम पर मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाया.
हालाँकि कोविंद की जीत सुनिश्चित है, क्योंकि वोट की गणित में एन.डी.ए. के पास लगभग 5 लाख 70 हज़ार यानि कि 60% वोट है और 20 राज्यों का भारी समर्थन भी प्राप्त है, जबकि यू.पी.ए आदि विपक्षी दलों के पास मात्र 40% वोट है. फ़िरभी यू.पी.ए. ने दलित व महिला नेत्री मीरा कुमार को उम्मीदवार बना कर सेक्यूलर बनाम हिंदू संघ के नाम पर विपक्षी दलों को एकजुट करने का अंतिम प्रयास किया है.
#___स्रोत_संदर्भ___
1. bbchindi.com
2. firsthindi.com
3. gnews
4. न्यूज वेवसाइट क्विंट
5. दैनिक जागरण
6. टाइम्स ऑफ इंडिया
7. हिंदुस्तान
8. इंडिया टूडे

भारत ने बाल श्रम पर आइएलओ के दो समझौतों की पुष्टि की

भारत ने बाल श्रम पर आइएलओ के दो समझौतों की पुष्टि की:
भारत ने बाल श्रम पर अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आइएलओ) के दो समझौतों की पुष्टि कर दी है। ये समझौते बाल श्रम के सबसे खराब तरीके को खत्म करने प्रति विश्व की प्रतिबद्धता और बच्चों को न्यूनतम बुनियादी शिक्षा दिलाने के लिए किए गए हैं।
केंद्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने समझौतों की पुष्टि के दस्तावेज 13 जून 2017 को आइएलओ को सौंपे। आइएलओ ने भारत द्वारा बाल श्रम के खिलाफ उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों का स्वागत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने दोनों समझौतों की पुष्टि की थी।
समझौता संख्या 138 रोजगार के लिए न्यूनतम आयु से संबंधित है और समझौता संख्या 182 बाल श्रम के खराब तरीकों को खत्म करने की तत्काल कार्रवाई से संबंधित हैं। नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी ने समझौते की पुष्टि करने पर भारत की सराहना की।